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अंतःकरण BACK

प्रिय दोस्तों, आज-कल हम सब पर टेक्नोलोजी का भूत सवार है और हम सब उसके अधीन हो गए हैं। यदि कोई मशीन अगर हमारी धारणा के अनुसार नहीं चले तो हम गुस्सा हो जाते हैं। कई बार मशीन में कोई समस्या नहीं होती, लेकिन हमें उसकी कार्य पद्धति का पता नहीं होता इसलिए ऐसा हो जाता है। इसीलिए जब भी हम कोई नई चीज़ खरीदते हैं, तब हमें मार्गदर्शिका एवं उसके इस्तेमाल के तरीके का निर्देशन दिया जाता है ताकि हम उसका उपयोग अच्छी तरह से कर सकें। लेकिन हमारे अमूल्य मानव जीवन के लिए हमें ऐसी कोई भी मार्गदर्शिका या निर्देशन नहीं मिलता। वविध परिस्थितियों में हम स्थिरता नहीं रख पाते और परेशान हो जाते हैं, गुस्सा करते हैं या फिर निराश हो जाते हैं वगैरह-वगैरह। कई बार दृढ़ निश्चय करने के बावजूद भी जैसा चाहिए वैसा व्यवहार नहीं कर पाते और हम निःसहाय महसूस करते हैं कि, ऐसा क्यों? दादाश्री कहते हैं कि पाँच इन्द्रियों से हम जो कुछ भी करते हैं या महसूस करते हैं, वह पहले हमारे अंदर होता है और बाद में बाहर परिणाम में आता है। इसलिए अगर हम मानव के सूक्ष्म और स्थूल शरीर की प्रक्रियाएँ एवं इनके कार्यों को समझें, तो हमारा भी जीवन सरल और सुखी बन सकता है। “अक्रम-यूथ” के इस अंक में हम मानव शरीर के आंतरिक हिस्से “अंतःकरण” को समझेंगे। “अंतःकरण” जिसके बारे में पूरी दुनिया जानना चाहती है और दादाश्री ने सब से पहली बार इस बारे में स्पष्टीकरण दिया है। अतःकरण किस प्रकार काम करता है, वह समझ लेने से, कोई भी व्यक्ति अपने तय किए हुए मार्ग पर, विपरीत संयोगों में बिना भटके, आसानी से प्रगति कर सकता है। पढ़ने का आनंद लो! जय सच्चिदानंद!