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लक्ष्मी जी के कायदे BACK

व्यवहारिक जीवन में हम देखते हैं कि कुछ लोगों के पास बहुत ज्यादा पैसा होता है, जबकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके पास दिन-रात की कड़ी मेहनत करने के बावजूद भी पैसा नहीं होता। इसका क्या कारण हो सकता है? इसके पीछे कौन सा रहस्य होगा? पैसे की ज़रूरत तो हर एक को होती है। फिर भी, पैसा कैसे आता-जाता है उसके गहरे रहस्यों को कोई लौकिक दृष्टि से कैसे समझ सकेगा? लक्ष्मी का आना-जाना कैसे होता है और लौकिक दुनिया में लक्ष्मी का व्यवहार कैसे करना चाहिए उसकी सही समझ अनुभवी ज्ञानी के अलावा कौन दे सकता है? इस समय के महान ज्ञानीपुरूष दादाश्री का कहना है कि लक्ष्मी, आज के जगत्‌ का केन्द्र बन गई है। अतः लक्ष्मी के प्रति हमेशा मान और विनम्रता रखनी चाहिए। लक्ष्मी का तिरस्कार कभी भी नहीं करना चाहिए। आप अगर धन-लक्ष्मी जी (धन की देवी) को प्रसन्न करना चाहते हैं तो आपको नारायण (हर एक के अंदर रहने वाले भगवान) को प्रेम करना पड़ेगा। लक्ष्मी, वह शाश्वत सत्य नहीं है बल्कि रिलेटिव सत्य है। लक्ष्मी, बुद्धि से/काबिलियत से नहीं आती, वह व्यक्ति के पुण्यकर्म से आती है। लक्ष्मी का आना-जाना लगा ही रहता है, और उसका संचालन कुदरत करती है। शुद्ध और नीति की लक्ष्मी से व्यक्ति का जीवन शांतिमय और आनंदित रहता है। व्यक्ति को वास्तव में अपने हक की ही कमाई करनी चाहिए, अनीति (अणहक) का या अशुद्ध पैसा ग्रहण नहीं करना चाहिए। जब आप अपनी लक्ष्मी का उपयोग शुभ कार्यों में करते हैं, तब वह पुण्यकर्म कहा जाता है। दादाश्री कहते हैं कि अगर आप अपने जीवन में पैसा-लक्ष्मी जी लाना चाहते हैं तो उनके कायदों का पालन करना पड़ेगा। जीवन की हर एक चीज़ वैज्ञानिक है और अगर आप उसके कायदे तोड़ेंगे तो लक्ष्मी जी ज़रूर आपकी अवगणना करेंगी। तो लक्ष्मी जी के कायदे कौन से हैं? चलो देखें... -डिम्पल मेहता