Share
मौत का कुँवा BACK

बालमित्रों, जाने-अंजाने हर एक जीव हमेशा सुख की खोज में रहता है। हमारे पूरे जीवन का पुरुषार्थ सिर्फ एक ही ध्येय प्राप्त करने के लिए रहता है : सुखी होना। इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन वास्तव में हम में से कितने लोग सुखी हैं? क्या हम सही दिशा में सुख की खोज कर रहे हैं? आजकल हम देखते हैं कि कई युवा सिर्फ मज़ा लेने की खातिर या तनाव मुक्त होने के लिए धूम्रपान, तंबाकू सेवन या दारू (शराब) पीने में व्यस्त रहते हैं। भविष्य में उन्हें कैसे-कैसे बुरे परिणाम भुगतने पड़ेंगे, इसकी परवाह किए बगैर वे सब ऐसा करते हैं। इन युवाओं को शुरुआत में इस बात का भान नहीं रहता कि जिस मार्ग पर वे चल रहे हैं, बाद में उस मार्ग से वापस आना कितना मुश्किल हो जाएगा। परेशानी यह है कि, जब तक वे व्यसनी नहीं बन जाते तब तक वे कुछ नहीं समझते या किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं होते। काफी समय बाद उन्हें यह सत्य समझ में आता है, लेकिन तब बहुत देर हो चुकी होती है। व्यसन के सब से बुरे परिणाम सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक होते हैं। व्यसनी अपनी इच्छा पूरी करने के लिए कभी-कभी किसी से उधार लेता है, भीख माँगता है या चोरी भी करता है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि उसका मान-सम्मान कहीं खो जाता है। उसे लगता है कि ये चीज़ें उसे सुख देगी लेकिन वही चीज़ें उसके दुःख और गुलामी का मुख्य कारण बन जाती हैं। “आज़ादी”, इस शब्द का अर्थ हम सभी जानते हैं और हम सभी अपने जीवन में आज़ादी चाहते हैं। सुखी होने के लिए सब से ज़रूरी चीज़ हम आज़ादी को मानते हैं। लेकिन हमें दुःख होता है जब हमारे कई मित्र अपनी गलत समझ के बलबूते पर सुख प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। गुलाम बनकर कोई कैसे सुखी बन सकता है? यह थोड़ी अलग प्रकार की गुलामी है। मित्रों, ऐसे व्यक्तियों के प्रति जो कि किसी भी व्यसन का शिकार हो चुके हैं, उनके लिए हमें सहानुभूति होनी चाहिए। इस माह का अक्रमयूथ ऐसे मित्रों को समर्पित करेंगे जिन्हें ऐसी मूर्खतापूर्ण भावना है कि धूम्रपान, तंबाकू और शराब, मोबाइल गेम खेलना या इस प्रकार की अन्य चीज़ें उन्हें सुख देगी। ये व्यसन हमारे या हमारे प्रिय साथियों के जीवन को बरबाद कर देता है। नीचे दिए गए पृष्ठों में हम इस सामाजिक दूषण के बारे में सिर्फ विस्तारपूर्वक चर्चा ही नहीं करेंगे बल्कि साथ ही व्यसन नाम की इस गुलामी की बेड़ियों से मुक्त होकर फिर से आज़ाद और सुखी किस प्रकार बन सकते हैं, इस बारे में दादाश्री की सही समझ भी प्राप्त करेंगे। आशा रखता हूँ कि यह अंक ऐसे प्रत्येक इच्छुक युवाओं के लिए मार्गदर्शक शक्तिस्त्रोत बनेगा, जो इस जोखिम से बाहर निकलकर, सही मार्ग पर लौैटना चाहते हैं। मानवजीवन अमूल्य है, चलो इसका ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग करें।