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जगत् कल्याण BACK

प्रिय मित्रों, आप सभी ने सुना ही होगा कि “हर एक काम की शुरुआत छोटे प्रयास से ही होती है” अथवा “हज़ारों मीलों का सफर पहले कदम से शुरू होता है”। आपको अचरज हो रहा होगा कि मैं क्यों लंबे सफर और बड़े काम की बातें कर रहा हूँ! जगत्‌ कल्याण - हाँ, आपने सही पढ़ा। परम पूज्य दादा भगवान की एक मात्र सांसारिक भावना, जिसके लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया था। इस महीने के अंक में हम “जगत्‌ कल्याण” इस टॉपिक पर बात करेंगे। दूसरे शब्दों में कहें तो, “इस जगत्‌ के लोगों को सुख-शांति और शाश्वत आनंद की खोज करनी चाहिए”। मुझे पता है आप सभी यही सोच रहे होंगे कि, “हम तो अभी छोटे हैं, यह सब जानने और समझने की हमें क्या ज़रूरत हैं? हम इसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं? जो चीज़ हमारे लिए शक्य नहीं उसके बारे में क्यों सोचें?” एक मिनट, किसी भी निर्णय पर पहुँचने की जल्दबाज़ी मत करना, क्योंकि मुझे पक्का विश्वास है कि इस महीने का अंक पढ़ने के बाद आप सभी जीवन पर्यंत इसी सफर में जुड़ जाने का निश्चय करेंगे। क्या आप जानते हैं कि दादा भगवान और नीरू माँ ने अपना पूरा जीवन जगत्‌ कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था और अब हम देखते हैं कि पूज्यश्री दीपकभाई भी दादा भगवान की इस भावना को पूर्ण करने में सतत कार्यरत हैं। इस निःस्वार्थ कार्य करने का कारण यह है कि आज भी हम जब दादा या नीरू माँ को याद करते हैं तब हमारा हृदय आनंद से छलक जाता है। जब पूज्यश्री हमारे आसपास होते हैं, हमें परमानंद एवं शांति का अनुभव होता है। निःस्वार्थ भाव से हो रहे जगत्‌ कल्याण का यह प्रभाव है। तो चलो, दादा भगवान की जगत्‌ कल्याण की इस भावना के बारे में समझे और जाने एवं उनके इस सफर में जुड़ जाएँ। चाहे एक छोटा कदम ही उठाएँ लेकिन यह तो तय है कि शाश्वत आनंद का अनुभव ज़रूर होगा।