Share
शुद्ध प्रेम BACK

मित्रों, हम में से कोई भी “प्रेम” शब्द से अन्जान नहीं है। कहीं न कहीं किसी न किसी प्रकार से सभी प्रेम की खोज में हैं और प्रेम की व्याख्या हर एक व्यक्ति के अनुरूप बदलती रहती है। बच्चे से पूछो तो अपने माता-पिता से चॉकलेट मिलना, वह उसके लिए उनका प्रेम है, एक शादीशुदा स्त्री की इच्छा होती है कि उसका पति उसे अच्छी तरह से समझे और वही उसके लिए पति का प्रेम है, जबकि बुज़ुर्ग इंसान को यह अच्छा लगता है कि उसके साथ कोई समय बिताए। इस प्रकार अलग-अलग उदाहरणों से प्रेम के अलग-अलग अर्थ निकलते हैं। माता का प्रेम पत्नी के प्रेम से अलग होगा और पत्नी के प्रेम से खुराक के प्रति प्रेम अलग होगा। ज्यादातर शुद्ध प्रेम की इस खोज के दौरान हम अनेकों व्यक्तियों को दुःख पहुँचा देते हैं, हमारा पतन होता है और भटक जाते हैं फिर भी दुर्भाग्य से हम प्रेम की खोज नहीं कर सकते... लेकिन क्या हम जानते हैं कि सच्चा प्रेम क्या है? नीरू माँ कहते हैं कि इस काल में सच्चा प्रेम मुश्किल से ही मिलता है। वह कभी भी निरंतर नहीं होता और जब व्यक्ति को उसमें असफलता मिलती है तब उस नुकसान को भरना बहुत मुश्किल हो जाता है। चलो, इस अंक में हम प्रेम को दादाजी की दृष्टि से देखें और सर्वत्र प्रेम फैलाना सीखें...