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प्रतिबद्धता BACK

प्रतिबद्धता अर्थात्‌ जिन्हें हम सब से ज्यादा मानते हैं उनके प्रति समर्पित होना और उनके लिए जब हमारे आशय, शब्द और क्रिया तीनों मिलकर कार्य करेंगे तभी हम जैसा चाहे वैसा परिणाम प्राप्त कर सकेंगे। यदि हम अपने ध्येय के प्रति समर्पित रहेंगे, तभी हम जैसा चाहें वैसा सृजन कर सकेंगे। यह हमारे जीवन का एक ऐसा महत्वपूर्ण पहलू है, जिसकी उपेक्षा हम नहीं कर सकते। लेकिन इसी के साथ बहुत से प्रश्न उठ सकते हैं कि हम किसके प्रति प्रतिबद्ध हैं? क्या हम अपने ध्येय के प्रति संपूर्ण समर्पित हैं? और इसके लिए हमने जिस मार्ग को अपनाया है, क्या वह योग्य है? इस मार्ग के अलावा अन्य विकल्प भी हो सकते हैं? अन्य दृष्टिकोण भी हो सकते हैं? उपरोक्त प्रत्येक प्रश्न का उत्तर इस अंक के लेख में शामिल है, जो प्रतिबद्धता के मार्ग में सहायक हो सके, ऐसी आशा से...