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शब्दों का असर BACK

हम कैसा बोलते हैं? कितने शब्द बोलते हैं? हमारे बोलने की शैली कैसी है? हमारे व्यक्तित्व में वाणी की महत्वपूर्ण भूमिका है। सुबह से लेकर रात तक हर एक का वाणी का व्यवहार अविरत चलता ही रहता है। मनुष्य जीवन में वाणी की शुरुआत हुए लगभग पंद्रह हज़ार वर्ष हो चुके हैं! शब्दों से तो हम पूरे जगत्‌ को जीत सकते हैं और शब्दों से ही हम दोस्त को दुश्मन और दुश्मन को दोस्त बना सकते हैं। अगर जीवन में सफलता प्राप्त करनी हो, तो इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि हम जो कुछ भी बोलते हैं, उस पर से दुनिया हमें देखती है। हम जो कर्म करते हैं, उस पर से दुनिया हमें जाँचती है। वाणी का व्यवहार दो तरह से परिणमित होता है। कड़वा या मीठा। मीठा तो खुशी-खुशी गले से उतर जाता है, लेकिन कड़वा नहीं उतरता। कड़वा-मीठा दोनों में समभाव रहे, दोनों एक ही समान उतर जाएँ, उसकी समझ ज्ञानी देते हैं! परम पूज्य दादाश्री ने वाणी के सिद्धांतों से संबंधित इस काल के सारे स्पष्टीकरण दिए हैं, जिन्हें विस्तारपूर्वक हम इस अंक में समझेंगे।