Share
भारतीय संस्कृति भाग -१ BACK

जय सच्चिदानंद! हिन्दुस्तान अपनी ढ़ेर सारी प्राकृतिक संपत्ति, लोगों की वैविध्यपूर्ण संस्कृति और खासतौर पर लोगों की गहरी आध्यात्मिक जागृति के लिए प्रसिद्ध है। दादाश्री ने कहा है कि, भविष्य में विदेश के लोग हिन्दुस्तान को आध्यात्मिक केन्द्र के रूप में स्वीकार करेंगे और यहाँ धर्म सीखने आएँगे। भारत पूरी दुनिया का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र बन जाएगा। दादाश्री ऐसा भी कहते हैं कि पाश्चात्य देश भौतिक एवं आर्थिक रूप से विकसित हैं लेकिन आध्यात्मिक क्षेत्र में कम विकसित हैं, जबकि भारत आध्यात्मिक क्षेत्र में पूर्णतः विकसित है लेकिन भौतिक और आर्थिक रूप से कम विकसित है। अतः आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास भारत की विशेषता है। भारतीय उपखंड में आध्यात्मिक रूप से विकसित लोग जन्म लेते हैं। यहाँ जन्म लेने वाले व्यक्तियों का पुनर्जन्म, कर्म का सिद्धांत और ऐसी दूसरी बातों पर विश्वास रहता है। यहाँ के लोगों को संस्कार और कर्म बंधन में दृढ़ विश्वास विरासत में मिले हैं। चलो, इस अंक में हम भारत के लोगों की आध्यात्मिक समझ एवं संस्कृति, जो दूसरों को अपनी ओर आकर्षि करती हैं, उन्हें समझें। अध्यात्म की एक डुबकी लगाकर भारत को और भी अच्छी तरह से समझने का प्रयत्न करेंगे। भारतीय संस्कृति की गहनता को एक ही अंक में बता पाना सँभव नहीं है इसलिए हमने इसका समावेश दो अंकों में किया है। इसे पढ़ने का मज़ा लीजिए।