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भारतीय संस्कृति भाग -२ BACK

हिन्दुस्तान की संस्कृति मानव संस्कृति जितनी ही पुरानी है। इस सम्मानित भारतीय समाज का हृदय पौराणिक संस्कृति में धड़क रहा है। भारत देश भव्य मंदिरों, विशाल हिमालय, राजनीति, बोलिवुड या क्रिकेट से कहीं ज्यादा विशेष है। विभिन्न परंपरागत उत्सव, त्योहार, लोक नृत्यों, धार्मिक रीति-रिवाजो, अलग-अलग भाषाएँ व बोलियाँ, जीवन से जुड़े हुए उच्च मूल्य वगैरह इस विशाल स्वतंत्र देश की सांस्कृतिक विविधता दर्शाते हैं। भारतीयों में पीढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे नैतिक मूल्य और आध्यात्मिक ज्ञान, इस देश की गर्व लेने योग्य अमूल्य धरोहर है। ऐसी सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है योग विज्ञान, जिसमें सिर्फ व्यायाम ही नहीं बल्कि अध्यात्म (जो कि योग विज्ञान का अभिन्न हिस्सा है) का भी समावेश किया गया है। इस विज्ञान को अब आंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति मिल गई है और "यूनेस्को" ने इसे भारत की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत के तौर पर स्थान दिया है। भारत में हज़ारों सालों से जिस प्रथा का पालन करते आ रहे हैं, ऐसी उच्च प्रथाओं में से एक है आश्रम प्रथा। आश्रम प्रथा, मानवजीवन को चार हिस्सों में बाँटकर उत्तम जीवनशैली जीने की कला पर आधारित है। इसका मूल उद्देश्य आत्मा का विकास है। अपना यह अंक इस दिलचस्प और गहन भारतीय संस्कृति की विशेषता की झाँकी करवाता है। "भारतीय संस्कृति" के इस दूसरे अंक में भी अनेक आध्यात्मिक गुरुओं की भूमि, ऐसे भारत की कई दिलचस्प जानकारीयों का समावेश किया गया है। आप सभी को यह अंक पढ़कर मज़ा आएगा ऐसी आशा के साथ।