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अक्रम विज्ञान टेस्ट द प्योरिटी BACK

पूरा जगत्‌ प्योरिटी ढूँढता है। चीज़ें, व्यक्ति, खाद्य सामग्री, जल और यहाँ तक कि हवा भी सभी को प्योर ही चाहिए। किसी को भी अशुद्धि पसंद नहीं है। लेकिन, क्या हमने कभी सोचा है कि हम कितने प्योर हैं? जीवन व्यवहार में धर्म या अध्यात्म में आगे बढ़ने के लिए हमें प्योरिटी की कितनी आवश्यकता है? दादाश्री की दृष्टि से दैनिक जीवन में लक्ष्मी, मान और विषय की प्योरिटी को मुख्य माना गया है। दादाश्री के जीवन में प्योरिटी के सिद्धांत इस प्रकार जुड़े हुए थे कि उन्होंने धर्म में, व्यापार में और गृहस्थ जीवन में लक्ष्मी, विषय और मान में खुद शुद्ध रहकर जगत्‌ को आदर्श व्यवहार दिखाया। दादाश्री कहते थे कि खुद अगर व्यवहार में शुद्ध रहे, जहाँ विषय-कषाय से संबंधित विचार भी न हो और भीख संपूर्णत्‌ः खतम हो जाए, तभी जगत्‌ का वास्तविक स्वरूप उसकी समझ में आएगा। लेकिन, अभी ऐसा काल है कि जहाँ मन-वचन-काया की एकता नहीं है इसलिए प्योर बनने की भावना के बावजूद प्योरिटी रख नहीं पाता। इसीलिए दादाश्री कहते हैं कि, "इस दुनिया में जितनी आपकी प्योरिटी रहेगी उतनी दुनिया आपकी।" तो चलो, दादाश्री के इस आशय को समझकर हम भी हमारे जीवन को प्योर बनाने की ओर प्रयाण करें।