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मोबाइल एडीक्शन BACK

व्यसन अर्थात्‌ क्या? ऐसा कार्य जिसकी बिल्कुल भी आवश्यकता न हो, फिर भी औरों का देखकर, बिना किसी नियंत्रण के, स्वेच्छा से अथवा इच्छा विरुद्ध होता रहे उसे व्यसन कहते हैं। किसी व्यक्ति अथवा चीज़़ के बिना न चले, किसी कार्य या विचार किए बिना न चले, वे सारे व्यसन हैं। किसी चीज़ या पदार्थ के बिना न चले, तो हम उस पदार्थ के गुलाम बन गए कहलाएगा। चीज़़ अथवा पदार्थ का व्यसन दो प्रकार से हो सकता है। एक तो चाय, कॉफी, तंबाकू, गुटका, शराब, हेरोईन वगैरह नशीले पदार्थ अथवा मिठाई, नमकीन या अन्य ऐसी चीज़ें जिसको ग्रहण किए बिना चैन न आए, तो उस पदार्थ के गुलाम हो गए। जैसे कि (इसी तरह) पंखा, ऐ.सी., बिजली, वाहन या अन्य कोई सुविधा का साधन न हो और उसके बिना परेशान हो जाएँ, तो उस साधन का व्यसन, अर्थात्‌ गुलामी हुई। अब इस सूचि में "मोबाइल का व्यसन" भी जुड़ गया है। मोबाइल एवं सोशल मीडिया सुख का अनिवार्य साधन बन चुका है। "हर एक सिक्के के दो पहलू होते हैं” मोबाइल फोन के कई फायदे होने के बावजूद नुकसान भी हैं, जिसके बारे में जागृत रहना ज़रूरी है। इस अंक में हम "मोबाइल एडिक्शन" के लक्षण उनकी विपरीत असरें और उनसे मुक्त होने के उपायों के बारे में विस्तारपूर्वक समझेंगे। चलो, हम व्यसन मुक्त रहने का पुरूषार्थ करके निरालंब सुख की अनुभूति करें।