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दादा मेरे जीवन में BACK

कल्पना करो कि आपके करीबी दोस्त के साथ आपका झगड़ा हुआ, उसके साथ समाधान भी हो गया और आप फिर से सब नए सिरे से शुरू करना चाहते हैं, लेकिन ठ हरोे, जब रात में आप सोने जाते हैं तब हमेशा की तरह नेगेटिव विचार आपको घेर लेते हैं और आप सो नहीं पाते। अब क्या? मान लो कि आपकी परीक्षाएँ करीब आ रही हैं और आप तनाव में हैं, आप उसमें पास होना चाहते हैं, लेकिन जब आप तैयारी करने की शुरुआत करते हैं तो उसमें आपका ध्यान कम या बिल्कुल ही नहीं रहता, तब क्या करेंगे? कुछ बातें हमारा पीछा ही नहीं छोड़ती, समय बीतने के साथ वे और ज्यादा सताती हैं, जो आखिरकार हमें निःसहाय बना देती हैं। क्या आपने भी कभी ऐसी परिस्थितियों का सामना किया है? अगर हाँ! तो हमारे पास इसका उपाय है और वह यह है कि रोज़िंदा के जीवन में आप पूज्य दादाश्री से जुड़े रहो। हाँ, समय का अभाव तो है ही लेकिन हमारे पास उसकाभी हल है। इस अंक को पढ़कर आपको भी लगेगा कि ज्ञानी के सान्निध्य में रखने वाले साधन, जैसे कि त्रिमंत्र, नौ कलमें, प्रतिक्रमण वगैरह आपका ज्यादा समय नहीं लेते बल्कि बदले में व्यक्ति उसमें से जो सुख, संतोष और शांति प्राप्त करता है वह अनुपम है। यह प्रयास करने में आप खुद के प्रति ऋणी रहेंगे। हम आपके प्रतिसाद सुनने के लिए उत्सुक रहेंगे। इस अंक को पढ़ने के बाद इस हल के बारे में आपके विचार ज़रूर बताना।