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मैं कौन हूँ BACK

यदि हम से कोई पूछे कि, "आप कौन हैं?" तो हम तुरंत अपना नाम बता देते हैं। यदि ज्यादा पहचान माँगे तो कहते हैं, इनका बेटा/बेटी हूँ, इनका भतीजा/भतीजी हूँ, इस स्कूल का विद्यार्थी हूँ, इंजि-नियर या डॉक्टर हूँ लेकिन इन सारे संबंधों में "मै”ं तो एक ही हूँ तो वास्तविक तौर पर "मैं कौन हूँ?" यह विचार तो आना चाहिए न! पूरे जीवन में अपने अस्तित्व के बारे में इतना महत्वपूर्ण प्रश्न लोगों के मन में उठता ही नहीं है। वास्तव में "मैं कौन हूँ?" इस प्रश्न के उत्तर में ही तमाम शास्त्रों का सार समाया हुआ है। यह एक ऐसी जड़ी-बूटी है जो हमारे जीवन के हर एक पज़ल का सॉल्यूशन ला सकती है। शारीरिक कष्ट या अपमान की परिस्थिति में व्यक्ति बहुत दुःख या भोगवटे में रहता है, लेकिन यदि वह वास्तव में "मैं कौन हूँ?" और ये घटनाएँ किसके साथ हुई हैं, ऐसा जानें तो इन सभी वेदनाओं से असरमुक्त रह सकता है और एक अनोखे आनंद का एहसास कर सकता है। इस अंक में ज्ञानी की दृष्टि से "मैं कौन हूँ?" की समझ को स्टेप बाय स्टेप और आसानी से समझ सकें इस तरह से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, जो अवश्य ही वाचकमित्रों के जीवन में उपयोगी रहेगा। -डिम्पल मेहता