Share
प्रार्थना का महत्वा BACK

बालमित्रों, इन्डिया की टीम फाइनल में जीत जाए, परीक्षा में अच्छे मार्कस्‌ मिलें, मनपसंद चीज़ पाने के लिए, दोस्त के साथ झगड़ा खतम करने के लिए, गलती करने के बाद मम्मी-पापा या शिक्षक के गुस्से से बचने के लिए, तबियत जल्दी अच्छी हो जाने के लिए, अरे! जब बाहर जाना हो तब बारिश न आने के लिए भी!!! दोस्तों मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि बचपन से लेकर अब तक आपने ऐसी कई बातों के लिए प्रार्थना का सहारा लिया होगा या आपके स्वजनों को प्रार्थना करते हुए देखा होगा। ऐसा भी अनुभव किया होगा कि हमारी प्रार्थना रूपी अरज़ी भगवान ने कभी स्वीकार ली होगी और कभी नामंजूर भी कर दी होगी और इस वजह से हमने भगवान को भी दोषित ठहराने में कोई संकोच नहीं किया होगा। प्रार्थना करना कोई गलत चीज़ नहीं है। सभी धर्मों ने, ज्ञानियों ने और महान पुरुषों ने प्रार्थना का महत्व समझाया है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सच्ची प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती। पौराणिक कथाओं में भी प्रार्थना की शक्ति का उल्लेख किया गया है। लेकिन दोस्तों, क्या आपने कभी प्रार्थना के वैज्ञानिक स्पष्टीकरण के बारे में सोचा है कि प्रार्थना किस तरह से काम करती है, कौन सुनता है, कब, किसे और किस प्रकार से करनी चाहिए? सच्ची प्रार्थना किसे कहते हैं और किस हेतु से करनी चाहिए? इन प्रश्नों के जवाब बहुत ही रोचक होंगे, मुझे तो ऐसा लगता है... ज्यादा समय व्यर्थ न करते हुए... चलो, अक्रम यूथ के इस अंक में प्रार्थना के बारे में गहराई से समझें और सच्ची प्रार्थना करना सीखें... -डिम्पल मेहता