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No एल्कोहल No ड्रग्स BACK

बालमित्रों, जीवमात्र सुख की खोज में रहता है। सुख पाने के लिए ही हर कोई व्यक्ति अपनी पूरी ज़िंदगी प्रयत्न करता है। लेकिन इतने प्रयत्नों के बावजूद भी क्या हम वास्तव में सुखी हुए? आज-कल हम देखते हैं कि कई युवा स्मोकिंग, गुटका या शराब का व्यसन करते हैं। भविष्य में इसके कैसे बुरे परिणाम आएँगे यह सोचे बिना ही कई युवा सिर्फ मज़ा करने के लिए या किसी तरह का स्ट्रेस कम करने के बहाने इन व्यसनों में डूबे रहते हैं। व्यसन से व्यक्ति की सामाजिक, मानसिक और आर्थिक बाबतों पर गंभीर असर होता है। युवा जिस व्यसन को सुख समझकर उसके गुलाम बन जाते हैं वही व्यसन बाद में उनकी परवशता और दुःख का कारण बन जाता है। दोस्तों, अक्रमयूथ का यह अंक ऐसे युवाओं के लिए हैं जिन्हें यह भ्रम है कि स्मोकिंग, गुटका या शराब में ही सुख है। इस अंक में हम व्यसनरूपी सामाजिक दानव के बारे में चर्चा करेंगे और पूज्यश्री से यह भी समझेंगे कि व्यसन के बंधन में से किस तरह छूट सकें। आशा करते हैं कि जो युवा व्यसन के चंगुल में से निकलना चाहते हैं, उनके लिए यह अंक मार्गदर्शक बन जाएगा। मनुष्य अवतार दुर्लभ एवं श्रेष्ठ है। चलो, उसका भरपूर लाभ लें। -डिम्पल मेहता