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मनोबल BACK

प्यारे दोस्तों, हर महीने की तरह इस महीने भी आप उत्सुकता से जिसकी राह देख रहे थे वह अक्रम यूथ का नये अंक में आपके हाथों में आ चुका है। हम सब अच्छी तरह से जानते ही हैं कि किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए दो चीज़ें बहुत ज़रूरी है। सर्व प्रथम तो निश्चय और निश्चय पर दृढ़ रहने की सिन्सियरिटी। निश्चय करना तो बहुत आसान है लेकिन सिन्सियर रहने में लगभग सब विफल जाते हैं। लेकिन दोस्तों क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? मेरी पढ़ाई, कामधंधा, तबियत या भविष्य को श्रेष्ठ बनाने के मेरे सारे प्रयत्नों का मनचाहा परिणाम क्यों नहीं मिलता? मेरा निश्चय क्यों डगमगा जाता है? मेरी सिन्सियरिटी क्यों टूट जाती है? ऐसा क्यों होता है? सफलता के शिखर पर पहुँचे हुए कई महानुभावों का जीवन चरित्र देखें तो एक खूबी सभी में समान ही मिलती है, फिर चाहे वह व्यक्ति किसी भी सामाजिक, राजकीय या व्यवसायिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ हो और वह खूबी है - "दृढ़ मनोबल।" कैसी भी मुश्किल परिस्थिति हो उसमें अपने निश्चय पर अटल रहने की शक्ति। तो चलो, अब ज्यादा राह न देखते हुए दैनिक जीवन में मनोबल कहाँ-कहाँ नहीं रह पाता? उसके कारण और मनोबल को किस तरह से ज्यादा मजबूत कर सकें, वह और भी दिलचस्प अंदाज़ में इस अंक में देखें। तो दोस्तों, आप सब तैयार हैं न मनोबल मज़बूत करने के लिए? -डिम्पल मेहता