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पैसे BACK

लक्ष्मी : दादा के शब्दों में कहें, तो हमारा। ग्यारहवाँ प्राण। दोस्तों, पैसों के फायदे की बात सुनते ही कैसी चेतना आ जाती है। जीवन की ज़रूरतों को पूरी करने के लिए बहुत ही आवश्यक ऐसी लक्ष्मी किसे नहीं चाहिए? ज़रूरतें पूरी करने के बाद सुख-सुविधाएँ, वैभव या मौज़-शौक के लिए या ज़रूरत से ज्यादा साधनसामग्री बसाने के प्रयत्न करते हैं, जिसके फल स्वरूप पैसों का फालतू व्यय या दुरुपयोग करते हैं। समय के साथ-साथ ये चीज़ें जीवन की ज़रूरतें लगने लगती हैं और इन्हें पूरा करने के लिए परिश्रम करते हैं। एन्डलेस (अंतहीन) साइकल शुरू हो जाती है : कमाना, खर्च करना, कमाना, बचत करना वगैरह... वगैरह। लेकिन वास्तव में जीवन व्यवहार में लक्ष्मी का आदर्श उपयोग इस तरह से करना चाहिए कि कभी कोई कार्य में रुकावट न आए और उसका सदुपयोग हो सके ताकि इस जनम में हमारी उन्नति हो सके और अगले जनम की भी सेफ्टी हो सके। दान देना पैसों का उत्तम सदुपयोग है जिसके विविध प्रकारों पर विशेष लेख दादा की वाणी में यहाँ प्रस्तुत है। पैसा-कमाई का प्लानिंग करके, दुरुपयोग रोककर हमारी अधोगति टाल सकते हैं और सदुपयोग करके "काम निकाल" सकते हैं। इस बार का अंक सभी के लिए बहुत उपयोगी रहेगा ऐसी आशा से यहाँ पैसों का दुरुपयोग, उपयोग और सदुपयोग के बारे में विविध प्रकार से रोचक समझ दी गई है। तो दोस्तों, चलो इस अगत्य के मुद्दे को समझें-इस अंक का मज़ा ले।