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कलम - १ अहम् न दुभे BACK

प्रिय युवा मित्रों, परम पूज्य दादा भगवान के कई जन्मों की व्यवहारिक समझ का सार जिसमें समाया हुआ है, दादा का अद्‌भुत आदर्श व्यवहार जिन भावनाओं के आधार पर इस जन्म में उदय में आया, ऐसी अभूतपूर्व नौ कलमें इस जगत्‌ को दादा द्वारा दी गई बड़ी भेंट है। इस भीषण कलियुग के फिसलन वाले काल में नौ कलमों की भावना हर एक व्यक्ति के लिए, चाहे ज्ञान लिया हो या न लिया हो, कषायों के चक्रवात से बचने का एक उच्चतम साधन है। संसार व्यवहार में तरह-तरह के दोष होते ही रहते हैं। इन दोषों के विरूद्ध निरंतर जागृति का पुरुषार्थ करना शायद सभी के लिए संभव नहीं हो लेकिन नौ कलमें इतनी उपयोगी है कि भावना करने से (दादाश्री ने दिन में तीन बार नौ कलमें बोलने के लिए कहा है) हमारा अभिप्राय बदल जाता है जिसके परिणाम स्वरूप समय के साथ-साथ ये दोष नरम होते जाते हैं और साथ ही अगले जन्म की सेफ साइड भी हो जाती है। इस अंक से हम अक्रम यूथ में नौ कलमें रूपी भावना, जो कि जन्मोंजन्म सुधार दे ऐसी शक्तिशाली हैं, उसकी श्रृंखला शुरू करेंगे। इस अंक में इसके बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे। आपको प्रश्न तो ज़रूर उठते होंगे कि अहम्‌ किसे कहते हैं? अहम्‌ किस तरह दुभता है? स्याद्‌वाद अर्थात्‌ क्या? वगैरह...वगैरह... तो चलो, किसकी राह देख रहे हैं? पहली कलम पक्की कर लेते हैं... अगले महीने दूसरी कलम के आने से पहले.... -डिम्पल मेहता