Share
कलम-४ किंचित्‌मात्र भी अभाव, तिरस्कार कभी भी नहीं करें BACK

प्रिय वाचक, नौ कलमों की यथार्थ समझ द्वारा ह्युमन से सुपर ह्युमन बनने की अपनी इस रोमांचक यात्रा को और आगे बढ़ाते हैं। छोटी-छोटी बातों में होन वाली अरुचि कब बड़ा स्वरूप लेकर अभाव और उससे भी आगे बढ़कर तिरस्कार में परिणमित हो जाती है इसका हमें पता नहीं चलता। लेकिन यह अभाव-तिरस्कार जो हो जाते हैं उसके परिणाम बहुत दुःखदायी रहते हैं। मित्रों, ऐसा कहा जाता है कि अगर हम किसी चीज़-वस्तु का भी अभाव या तिरस्कार करते हैं तो ऐसे अंतराय पड़ जाते हैं कि वह चीज़ हमें दोबारा कभी नहीं मिलती। तो फिर जीवित व्यक्तियों के प्रति अभाव या तिरस्कार करेंगे तो उसका फल तो ज्यादा जोखिम वाला अवश्य होगा। तिरस्कार के तीन बड़े जोखिम के बारे में दादा भगवान कहते हैं कि जिसका तिरस्कार करेंगे उसका भय लगेगा। इस तिरस्कार के कारण कभी भी छूट नहीं सकेंगे। इससे तो मात्र बैर बँधेंगे। जहाँ तिरस्कार और निंदा होते हैं वहाँ लक्ष्मी नहीं रहती। चलो, अक्रम यूथ के इस अंक से अपनी चौथी कलम के बारे में विस्तारपूर्वक समझ प्राप्त करें और अभाव एवं तिरस्कार से दूर रहने के लिए दादा से शक्ति माँगे। -डिम्पल मेहता