Share
कलम ५- कठोर भाषा, तंतीली भाषा न बोली जाए BACK

मित्रों, वाणी हमारे अच्छे-बूरे अभिप्राय, भावों या भावनाओं को अभिव्यक्त करने का बहुत ही असरकारक माध्यम और हमारे व्यक्तित्व का आईना है। यदि एक तरफ वाणी द्वारा निकले हुए अच्छे शब्दों से संबंध सुधर जाते हैं तो दूसरी तरफ वाणी द्वारा बोले गए कठोर शब्दों से ज़बरदस्त बैर भी बँध जाता है। कहावत है कि “तलवार के घाव भर जाते हैं लेकिन वाणी के घाव नहीं भरते।” इस कहावत को चरितार्थ करने वाले कई उदाहरण इतिहास के पन्नों में अंकित हैं। “अंधे के बच्चे अंधे।” पांडव पत्नी द्रौपदी के मुख से निकले इस एक ही वाक्य ने चचेरे भाईयों के बीच महाभारत के भीषण युद्ध के कैसे बीज बो दिए थे, यह तो हम सब जानते ही हैं। ‘हमारी वाणी द्वारा किसीको दुःख न हो,’ ऐसा सामान्य भाव तो हम सब को है ही, फिर भी ऐसी वाणी बोल देते हैं जिससे हमारे मित्र, परिवार के लोग या तो जिसके भी साथ व्यवहार करते हैं उन्हें चोट लग जाती है। अक्रम यूथ का यह अंक नौ कलमों में से पाँचवी कलम पर आधारित है जो इसी कमी को तोड़ने की शक्ति प्रदान करेगा। मुझे विश्वास है कि इस अंक को पढ़ने के बाद पाँचवी कलम द्वारा शक्ति माँगकर सब को प्रिय लगे ऐसी वाणी बोलने का आपका भाव और भी मजबूत हो जाएगा।