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प्रिय मित्रों, बचपन मं आप सभी ने सात पूँछ वाले चूहे की कहानी तो सुनी ही होगी। सात पूँछ की वजह से लोग उसे चिढ़ाते थे इसलिए उसने पूँछ कटवाने की शुरुआत की। आखिरकार सारी पूँछे कटवाने के बाद भी लोग उसे ‘बिना पूँछ वाला चूहा’, ‘बिना पूँछ वाला चूहा’ कह कर चिढ़ाने लग। दोस्तों, क्या आप भी अपने कपड़ों को लेकर, खाने-पीने को लेकर, पढ़ाई या किसी भी छोटे-मोटे काम को लेकर ऐसा सोचते हैं कि मरी क्या छाप पड़ेगी? लोग मरे बारे मं क्या सोचेंग? दूसरों द्वारा की गई टिप्पणी या सूचनाओं को पॉजि़टिव तौर पर लेने के बजाय अगर आपको उनके प्रति द्वेष हो जाता है तो आपको सोचने की ज़रूरत है कि कहीं आप भी हमारी कहानी के चूहे की तरह तो नहीं बनने जा रहे? औरों के अभिप्रायों का जरूरत से ज्यादा दबाव से हमारे मन और शरीर पर नकारात्मक असर हुए बिना नहीं रहेगा। लेकिन घबराइए मत, आपके प्रिय अक्रम यूथ मं इस महीने हम इसी विषय पर चर्चा करेंग। आपको भी जीवन मं कभी ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़े तो उसके लिए कैसी समझ होनी चाहिए उसकी चाबियाँ प्राप्त करने के लिए यह अंक अवश्य पढ़ना ही पढ़ेगा.... तैयार हैं न????