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झूठ की भूल-भुलैया BACK

प्रिय मित्रों, इस अंक का मुखपृष्ठ देखकर आप समझ ही गए होंग कि इस महीने चर्चा का विषय क्या है? हाँ दोस्तों, झूठ बोलना, यह एक ऐसी गलत क्रिया है जो हममें से कई लोग कम या ज्यादा प्रमाण में जाने-अनजाने में ही लेकिन नियमित रूप से करते ही होंगे। एक सर्वेक्षण के अनुसार झूठ बोलना एक ऐसा दुर्गुण है जिसमें ज्यादातर लोग बहुत कुशल रहते हैं और बिना कारण ही मित्रों, परिवारजनों या सहकर्मियों के साथ बड़ी आसानी से झूठ बोल देते हैं। छोटी-छोटी बातों में झूठ बोलने की शुरुआत होती है जो आगे चलकर कब झूठ बोलने की बूरी आदत में बदल जाती है इसका पता ही नहीं चलता। और फिर झूठ की भूल-भुलैया से बाहर आना बहुत मुश्किल हो जाता है। कहते हैं न कि एक झूठ छिपाने के लिए सौ झूठ की ज़रूरत पड़ती है। इस मायाजल में जो एक बार फँस जाता है वह इसमें और ज्यादा उलझता ही जाता है। लेकिन मित्रों, अगर आप भी इस भूल-भुलैया में फँस गए हैं तो आपको उलझने की ज़रूरत नहीं है। मुझ पूरा विश्वास है कि इस अंक को पूरा पढ़ते ही आपको इस भूल-भुलैया से बाहर आने का एक सरल और आसान मार्ग मिल जाएगा। - डिम्पल महेता