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मित्रों, हमें जीवन में कदम-कदम पर अलग-अलग तरह के प्रश्न होते ही रहते हैं। प्रश्नों का होना और उनका समाधान प्राप्त करना कुछ गलत नहीं है। यदि वैज्ञानिकों को प्रश्न नहीं हुए होते और वे उनका जवाब ढूँढने के प्रयास नहीं किए होते तो शायद भौतिक विज्ञान में इतनी खोज भी देखने को नहीं मिलती। सभी चीज़ें जो कि आज हमारे जीवन का एक हिस्सा बन गई हैं, जैसे कि मोबाइल, इन्टरनेट, टी.वी. कार, बाइक वगैरह की खोज की जड़ में “प्रश्न” ही थे और उसके जवाब के रूप में इन सभी भौतिक साधनों का इन्वेन्ट किया गया। आध्यात्मिक विज्ञान में भी साधक को होने वाले प्रश्न ही उनकी प्रगति की मुख्य वजह बनते हैं। जगत्‌ कौन चलाता है? संसारियों का और स्त्रियों का मोक्ष क्यों नहीं हो सकता? यदि दादाश्री को ऐसे प्रश्न नहीं हुए होते तो शायद इतना अद्भुत अक्रम विज्ञान भी प्रकट नहीं हुआ होता! जीवन में साधारतः क्या, क्यों कब, कैसे, ऐसे प्रश्नों के जवाब प्राप्त करने के लिए हम प्रयत्न करते रहते हैं लेकिन प्रश्न किसलिए पूछे, कैसे पूछे, किससे पूछे, किस तरह से पूछे और उसमें कहीं विवेक न चुक जाएँ, इसका ध्यान अवश्य रखना चाहिए। प्रस्तुत अंक में मुख्यतः “क्यों?” - एक ऐसा सामान्य प्रश्न, जो हमारा कभी पीछा ही नहीं छोड़ता है। इसके बारे में बहुत ही सूक्ष्मता से बात की गई है। “क्यों?” प्रश्न पूछने का हेतु, उसके फायदे और नुकसान, “क्यों?” प्रश्न का महत्व वगैरह की अलग-अलग बातें की गई हैं। इसके अलावा इस अंक में प्रश्न पूछने से जुड़ा हुआ विस्तृत मार्गदर्शन भी इसमें दिया गया है जो आपके लिए बहुत उपयोग साबित होगा, इसी उम्मीद के साथ... - डिम्पल मेहता