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मिट सकती है ये दुरियाँ BACK

प्रिय मित्रों, किशोर अवस्था में कदम रखते ही ज्यादातर यंग लड़के-लड़कियों का उनके माता-पिता के साथ संबंधों में बड़ा बदलाव देखा जाता है। जिन माता-पिता ने अपनी अनुकूलता या परिस्थिति की परवाह किए बिना कई कष्टों को सहन करके, तुम्हारी सभी ज़रूरतों को पूरी करते हुए तुम्हें पढ़ाया-लिखाया, अच्छा जीवन जीने के लायक बनाया, वही पेरेन्ट्‌स तुम्हें पुराने जमाने के और किचकिच करने वाले लगने लगते हैं। इतना ही नहीं, बात-बात में माता-पिता के साथ उद्दंड वर्तन या दुःख देने की भूल भी हो जाती है। परिणामस्वरूप पेरेन्ट्‌स और यूथ के संबंधों के बीच एक दरार बन जाती है जो समय बीतने के साथ और बढ़ते जाती है। ऐसा होना शायद स्वभाविक है क्योंकि तुम्हारे पेरेन्ट्‌स उनके युवावस्था के दौरान तुम्हारी तुलना में बहुत अलग सामाजिक और आर्थिक संयोगों का अनुभव किए होते हैं जिसका प्रभाव उनके विचारों और रहन-सहन पर जीवन भर रहता है। इस असमानता के कारण उनके और तुम्हारे विचारधारा और जीवनशैली में बहुत अंतर देखा जा सकता है। जिसे अंग्रेजी में हम जनरेशन गैप कहते हैं। जिसके फलस्वरूप इस सुंदर और प्रेममयी संबंधों में संघर्षण शुरू हो जाते हैं और समय रहते यदि उसका समाधान न किया गया तो समस्या और ज्यादा जटिल होते जाती है। लेकिन क्या इस गैप को दूर करने का कोई उपाय है? हाँ मित्रों, बहुत सरल उपाय है और वह भी तुम्हारे हाथ में है। अक्रम यूथ के इस अंक में माता-पिता और यूथ के बीच एक दूसरे के साथ व्यवहार में आने वाली मुश्किलें और उसके निराकरण पर चर्चा की गयी है जो हर एक युवा लड़के-लड़कियों को अपने पेरेन्ट्‌स, जिन्हें ज्ञानी और शास्त्रकारों ने जीवंत भगवान की दर्जा दी है, उनके साथ संबंधों को मधुर बनाने में बहुत ही मददगार होंगे। -डिम्पलभाई मेहता