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कर्ण BACK

मित्रों, हम सभी को प्रिय पौराणिक कथा महाभारत मं कोई भी एक व्यक्ति मुख्य पात्र या महानायक नहीं है। लेकिन फिर भी महाभारत के कई प्रभावशाली पात्र अपने विशिष्ट व्यक्तित्व के कारण इतिहास मं अमर हो गए। पिछले अंक मं हमने भीष्म पितामह के बारे मं कई अनोखी बातें जानीं, अब इस अंक मं हम महाभारत के एक और प्रभावशाली पात्र महारथी कर्ण के बारे मं जानेंग। महारथी कर्ण के जीवन के अनेक विरोधाभासी पहलू उनके व्यक्तित्व को और भी रोचक बनाते हैं। एक क्षत्रिय राजकुमार होते हुए भी उन्हें जीवन भर सारथीपुत्र के तौर पर अपमान और उपहास सहन करने पड़े। एक तरफ कर्ण को भरी सभा मं द्रौपदी का अपमान करने के कार्य मं सहभागी बनने और युद्ध मं अवैध रूप से अभिमन्यु का वध करने जैसे जघन्य दुष्कमरें के लिए दोषी माना जाता है तो दूसरी तरफ उनकी दानवीरता और वफादारी की तुलना महाभारत के किसी अन्य पात्र के साथ नहीं की जा सकती। अधर्म यानी कि कौरवों के पक्ष मं होने के बावजूद भी लोगों के मन मं उनकी छवि एक आदरणीय महायोद्धा के तौर पर हमशा बरकरार रहेगी। इसका कारण क्या है? तो चलो, समय बर्बाद न करते हुए पढ़ते हैं... दुर्योधन के इस परम मित्र अंगराज कर्ण के बारे मं कुछ सुनी-अनसुनी बातें। और साथ ही यह भी समझंग कि इनमं से हमं क्या सीखना है। - डिम्पल भाई महता