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लाइफ का द एन्ड BACK

प्यारे मित्रों, जन्म और मृत्यु का सिलसिला अनिवार्य है और यह किसी के हाथ मं नहीं है। जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यु अवश्य होती है। यह एक ऐसा सत्य है जिसका सामना हर व्यक्ति को अपने जीवन मं करना ही पड़ता है। दूसरी ओर, परिजनों की मृत्यु को स्वीकारना बहुत ही दुःखदायी होता है। मृत्यु के बारे मं अलग-अलग तरह की मान्यताएँ प्रचलित हैं लेकिन मृत्यु की वास्तविकता के बारे मं कोई बता नहीं पाया है। क्योंकि जिसकी मृत्यु हो जाती है वह अपना अनुभव बता नहीं सकता और जिसका जन्म होता है वह अपनी पिछली अवस्था स्थिति के बारे मं जानता नहीं है। इस तरह मृत्यु से संबंधित प्रश्नों ने अनंत काल से लोगों के मन मं भय और भय का जाल फैला रखा है। विज्ञान की इतनी प्रगती होने के बावजूद भी इस बारे मं कोई स्पष्टीकरण नहीं हो पाया है। मृत्यु जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर आधारित अक्रम यूथ के इस अंक मं जीवन की सबसे कठिन और अटल अवस्था के संबंध मं अनजाने रहस्यों को उजागर करने का प्रयास किया गया है। आशा है कि ज्ञानी पुरुष दादाश्री द्वारा बताई गई यह हकीकत हमं इस कड़वी वास्तविकता को स्वीकार करने के लिए योग्य समझ प्रदान करेगी। साथ ही साथ, जीवन मं कभी ऐसे संजोगों का सामना करना पड़े तो प्राप्त समझ द्वारा स्थिरतापूर्वक, शोक-दुःख मं रहे बिना दूसरों को भी इस दुःख मं से बाहर निकाल सकने मं समर्थ बनकर मदद रूप हो पाएँग... - डिम्पल भाई मेहता