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मन BACK

मित्रों, पढ़ाई करते समय मेरा मन किया कि मैं खेलने जाऊँ, खाना खाते समय मेरा मन किया कि मैं टी.वी देखूँ, मेरा मन करता है कि मैं दिन भर मोबाइल में गेम खेलूँ या यूट्यूब में वीडियो देखूँ, मेरा किसी के साथ बात करने का मन नहीं कर रहा है, वगैरह, वगैरह... लगभग सभी को कभी न कभी तो ऐसा महसूस हुआ ही होगा और अगर एक बार मन किया ऐसे जितने ही काम मन का सुनकर आप करते ही होंगे । चाहे फिर वो आपके हित में ना हों या फिर ध्येय के विरुद्ध ही क्यों न हों । सही कहा ना? ऐसा लगता है जैसे उस समय अपना पूरा कन्ट्रोल ही मन के पास हो । कबीर जैसे संतों ने तो कहा है कि जो व्यक्ति मन के कहे अनुसार चलता है वह अपना सर्वस्व खो देता है । मन के बारे में न र्सिफ वेद बल्कि तत्त्वविज्ञान और आधुनिक मनोविज्ञान में विस्तारपूर्वक विश्लेष्ण किया गया है। उनका ऐसा निष्कर्ष है कि मन ही मनुष्य के समग्र जीवन का मुख्य आधार है। जीवन मं वांछित परिणाम पाने हों तो मन को स्थिर करना अथवा उसे वश करने जैसा दूसरा कोई उत्तम उपाय नहीं है। लेकिन यह जानकर आश्चर्य होगा कि मन के बारे में प्रचलित इन सभी मान्यताओं से वास्तविकता बिल्कुल भिन्न है। यह मन क्या है, जिसका मानव जीवन के उपर इतना प्रभाव है? क्या आपको मन संबंधी विज्ञान जानने का ‘मन’ कर रहा है? तो आओ, मन के सच्चे स्वरुप को पहचानें और उसके साथ किस तरह से काम लेना वह कला सीखें, अक्रम यूथ के इस अंक में... देखो, आपका मन बदल जाए उससे पहले पढ़ लेना... - डिम्पल भाई महता