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अपेक्षा BACK

प्रिय पाठक मित्रों, मुझे पूरा विश्वास है कि अक्रम यूथ मैगज़ीन के माध्यम द्वारा हर महीने प्राप्त होने वाली समझरुपी चाबियाँ आपको परेशान करने वाली छोटी-बड़ी समस्याओं के ताले आसानी से खोलने मैं मददगार साबित होती होंगी। इस महीने, ऐसी ही एक सुनहरी चाबी लेकर फिर से आया है अक्रम यूथ का नया अंक, जिसका विषय है ‘अपेक्षा’। ‘अपेक्षा’ शब्द बहुत सरल है और हम सभी के जीवन मैं सहज ही गूंथा हुआ है। हम निरंतर ही किसी न किसी चीज़ की अपेक्षा रखते हैं या कोई न कोई व्यक्ति से अपेक्षा रहती है। सुबह जागने से लेकर रात को सोते समय तक माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, टीचर्स, चीज़-वस्तु, वगैरह- वगैरह के साथ हमारी कुछ न कुछ अपेक्षा जुड़ी होती है और अगर हमारी अपेक्षा अनुसार न हुआ तो दुःखी होते रहते हैं। प्रस्तुत अंक मैं संकलित की गई समझ को अगर प्रत्येक प्रसंग मैं याद रखें तो आप हमशा आनंद मैं और सुख से रह सकोगे ऐसी ‘अपेक्षा’... सॉरी, आशा रखने मैं मुझे कुछ गलत नहीं लग रहा है। जय सच्चिदानंद!!! - डिम्पल भाई महेता